क्रिसमस – मानव मुक्ति और समानता का प्रतीक

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क्रिसमस का त्यौहार ईसा मसीह के जन्मदिन की खुशी के उपलक्ष्य में हर वर्ष 25 दिसम्बर को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। विश्वभर में इस त्यौहार की रोनक दिवाली के पर्व जितनी ही अनूठी होती है। माना जाता है कि यह ईसाई धर्म का मुख्य त्यौहार है इस दिन ईसाई लोग चर्च में जाकर जीसस के सामने मोमबतियाँ प्रज्जवलित करते हैं। बाइबिल ग्रंथ के अनुसार, लोगों के मसीहा यीशु मसीह के जन्म की भविष्यवाणी याशायाह के माध्यम से पहले ही की जा चुकी थी। उन्होने समाज में समानता लाने के लिए सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वासों का विरोध किया। उनका जीवन मानव कल्याण,गरीबों,दलितों और जरूरतमंदों की जरूरतों को पूरा करने में समर्पित कर दिया। बाइबिल में दर्शाई कहानी के अनुसार ईसा मसीह यहूदी धर्म से थे और यहूदी गैर संप्रदाय से अच्छा व्यवहार नहीं करते थे उन्हें दलित माना जाता था किंतु ईसा मसीह ने एक गैर संप्रदाय स्त्री के हाथ से पानी पिया। ताकि लोगों में समाज कल्याण की भावना आ सके और यही प्रतिरोध उनके जीवन पर हावी हो गया। जन कल्याण के लिए उन्हें क्रॉस पर लटकाकर उनके प्राण ले लिए गए। जाते वक्त भी वे समाज को कुरीतियों और अत्याचारों के विरूद्ध लड़ने का संदेश दे गए।

क्रिसमस को भारत में बड़े दिन के साथ संबोधित किया जाता है।इस दिन सेंटा क्लॉज जिन्हें फादर ऑफ क्रिसमस कहा जाता है वो रेंडियर पर किसी बर्फीले जगह से आते है और बच्चो को नए-नए उपहार देते हैं। ऐसा माना जाता है सेंटा क्लॉज की प्रथा संत निकोलस ने शुरू की थी। उन्हें बच्चो से बहुत लगाव था। उनका उद्देश्य गरीबों और अमीरो में समानता स्थापित करना था। तभी से यह प्रथा चली आ रही है।

इस दिन चर्चो की सजावट देखने लायक होती है। लोग चर्च में मोमबत्ती प्रज्जवलित करते हैं। क्रिसमस वृक्ष को सजाने की परंपरा भी प्राचीनकाल से चली आ रही है। क्रिसमस वृक्ष को सजाने का महत्व सभी बुराइयो और कुरीतियों को दूर रखना है। लोग अपने घरों में क्रिसमस वृक्ष जरूर रखते है ताकि घरो को बुरी नजर से बचा सके ।

आज हमारे पूर्व प्रधानमंत्री व भारतीय राजनीती के शिखर पुरूष,स्वच्छ छवि के युग पुरूष व भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्मदिवस भी है। हम उनके अच्छे स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना करते हुए हार्दिक शुभकामनाए देते हैं।

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