जब माल्याओं की माला बनने लगे। फिर देश का पैसा महफूज नही।।

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Business Mantra: Faridabad

अपने भारतीय बैंको से अथाह कर्ज लेकर और व्यवसाय में हानि होने पर या फिर व्यवसाय में हानि दिखा कर, विदेश भाग जाने का जो कुकृत्य माल्या ने किया वह जग जाहिर है। यह किसी बड़े व्यवसायिक समूह (Business House) के चेयरमैन के द्धारा ऐसे कदम उठाने की शुरुआत के तौर पर दिख रहा है।

boxमाल्या ने अपनी ही तरह के लोगों को रास्ता दिखाया कहिए, या यों कहिए कि रास्ता है यह सभी को पता था परन्तु माल्या ने उस पर चल कर दिखाया। अब निकट भविष्य में ऐसे और माल्या देखने को मिलेंगे। बैंको का लाखों करोड़ रुपया NPA के रुप में अटका हुआ है। हाल ही में Economics Times के पोर्टल पर खबर थी कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अग्रणी बैंक (Lead Bank) भूमिका वाले बैंकीय संघ (Consortium) ने Alok Industries को लगभग 20,000 करोड़ ऋण के तौर पर दिया है। अब बैंको को इस ऋण वापसी की कोई उम्मींदे नजर नही आ रही है। हाल ही में सभी बैंको की सामूहिक सभा (Meeting) में बात सामने आई है कि आलोक इन्डसट्रिज ने बैंको से कर्ज के रुप में लिए हुए पैसो को अपनी व्यवसायिक गतिविधियो में ना लगाकर वहॉ से निकल लिया और देश और विदेशो में Real Estate मे निवेशित कर दिया। इस निवेश की सूचना एंव जानकारियाँ बैंको को नही दी गई।

मिडिया रिर्पोटरस के मुताबिक अब स्वय अपने आडिटर नियुक्त कराके यह अंकेक्षय कराना चाह रहे है कि जो पैसा बैंको ने दिया वह कम्पनियो ने कहा और किस प्रयोजन के लिए प्रयोग किया है। अभी हाल ही में अप्रेल 2016 में रिर्जव बैंक ऑफ इड़िया ने 500 करोड़ से अधिक वाले बैंक ड़िफाल्टर्स की लिस्ट supereme court में जमा कराई। यह तो हद हो गई कि बैंक और RBI, इतने बड़े-2 लोन ड़िफाल्टर्स के नाम भी ज़ाहिर करने को तैयार नही थे, और जब जस्टिस ठाकुर वाली सुप्रीम कोर्ट बैंक ने आदेश दिया तब कर्जदार जिन्होने बैंको का 500 करोड़ और उससे अधिक राशि कों चुकाने में असर्मथता जाहिर की हुई है और वे एक अत्यन्त विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे है।

NPA Defaulters नाम उजागर करने ही पडेगे। उन नामों को यह कह कर नही छिपाया जा सकता कि इससे बैंको और उन कर्जदारो के बीच के सम्बन्धों के खराब होने का भय है। अरे भाई, जब उन्होने जान बूझ कर बैंको का पैसा अन्य गतिविधियो में लगा दिया और उसे चुका भी नही रहे है। और उनकी जीवन शौली को देखें तो उनके माथे पर इस बात की कोई शिकन तक नही है। मतलब ऐसे कर्जदारों ने बैंको के साथ अपने सम्बन्ध बिगाड़ने में कोई कोर कसर नही छोड़ी है तो बैंक के अधिकारियों को ये सम्बन्ध इतने प्रिय क्यों लगते है। यह भी कोई गहरे राज की बात नही है, क्योकि हमारे पाठक और भारतीय जनता इतनी विवेकशील तो है ही कि इन बातों को समझ सके।

अभी कुछ समय पहले ही पंजाब नेशनल बैंक ने अपने Willful Defaulters की एक ऐसी लिस्ट जाहिर की जिसमें 904 लोगों के नाम थे और उनका कर्ज लगभग 11000 करोड़ रुपया था।

जो नाम ओर राशि बैंको ने NPA घोषित की है, उससे भी अधिक खतरनाक ऑकड़े वो है जो खाते NPA हो चुके है परन्तु फिर भी अधिकारी उनको प्रत्येक तिमाही के अन्त में कुछ adjustment entries डालकर उन्हे NPA घोषित नही होने देते। ऐसे ऑकलन लगाए जा रहे है, कि अघोषित NPA खातों में कर्जस्वारुप दी गई कुल राशि बैंको की पूँजी का 30%  से 75%  तक हो सकती है।

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