जानिए- इन्कम टैक्स रिटर्न समय पर न भरने के क्या है नुकसान

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Business Mantra: Faridabad


आयकर रिटर्न भरने की अन्तिम तिथि 31-7-2016 जा चुकी है। इस बार आयकर विभाग ने अन्तिम दिनों में बैकों की हडताल और 31 JULY को रविवार की छुट्टी के कारण रिटर्न भरने की अन्तिम तिथि को 5 AUGUST तक बड़ा दिया हैं। जो किसी भी कारण से अपनी आयकर रिटर्न नहीं भर पाए है, उन लोंगों के लिए यह यह अवसर है कि वे अगले 5 दिनों में अपनी रिटर्न समय पर भर दें।

अधिकतर लोंगों में यह धारणा है कि रिटर्न भरने की अन्तिम तिथि निकलने के बाद भी 31 मार्च तक रिटर्न भरने का कोई खास नुकसान नही है, लोग ऐसा समझते है, कि यदि उनका टैक्स पहले ही  TDS  के रूप मे कटा है या उन्होने एंडवास टैक्स जमा किया हुआ है तो उन्हे अगली 31 मार्च तक रिटर्न भरने पर न कोई ब्याज और न कोई पैनलटी (PENELTY) देनी होगी। परन्तु आयकर एक्ट के अनुसार रिटर्न देरी से जमा कराने के कई और नुकसान भी है जैसेकि :

1) देरी से भरी हुई रिटर्न को संशोधित (REVISE) नही किया जा सकता: कई बार आयकर रिटर्न जमा कराने के बाद करदाता को यह अहसास होता है की गई विवरिणी ( INCOME TAX RETURN) में कुछ गलतियाँ  रह गई है जिनके कारण जमा की गई विवरिणी में आय का सही विवरण नही है तो कर दाता के पास देरी से जमा की गई रिटर्न को संशोधित (REVISE) करने का अवसर नही होता यह नियम वित्त वर्ष 2015-16 की रिटर्न पर भी लागू है, परन्तु अगले वित वर्ष 2016-17 की रिटर्न भरने मे देर होने की अवस्था में भी उसे सशोधित करने की छूट दे दी गई है।

2) हानि को अग्रनीत करना संभव नहीं (NO CARRY FORWARD OF LOSSES) – यदि किसी भी करदाता को वित्तीय वर्ष के दौरान किसी भी प्रकार की हानि है और वह उसे अगले वितीय वर्ष मे अग्रनीत ( CARRY FORWARD) करना चाहता है ताकि वह अगले वितीय वर्ष मे, होने वाले लाभों से उसे समायोजित ( SET OFF) कर सके तो ऐसा करना देरी से भरी गई विवरिणी के सम्बन्ध मे संभव नही होगा।

एवं उस गलत विवरण को यदि आयकर विभाग पकड़ लेता है तो आयकर कानून के अनुसार विभिन्न प्रकार के दण्ड और ब्याज देने होंगें।

3)  बकाया कर पर ब्याज- देरी से जमा कराने वाली रिटर्न के सम्बन्ध में यदि कोई आयकर राशि देय है तो बकाया कर पर 1% प्रतिमाह की दर से ब्याज देना होगा।

4) REFUND पर मिलने वाले ब्याज मे कटौती– यदि किसी आयकर विवरणि मे ज्यादा आयकर (ADVANCE TAX OR TDS) के रूप मे जमा हो गया हे और आयकर रिटर्न के अंदर REFUND की माँग की गई हो तो, यदि आयकर रिटर्न तय समय सीमा के अंदर जमा कराई गई है तो अधिक जमा की गई राशि पर मिलने वाले ब्याज की गणना कर निर्धारण वर्ष के 1 अप्रैल की तिथि से की जाएगी। परन्तु यदि आयकर रिटर्न देरी से जमा कराई गई है तो REFUND पर मिलने वाले ब्याज की गणना रिटर्न जमा कराने की तिथि से की जाएगी।

5) यदि आयकर विवरिणी, कर निर्धारण वर्ष के 31 मार्च के बाद जमा की जाती है तो देय ब्याज के साथ 5000 रू तक का अतिरिक्त जुर्माना भी देना पढ़ सकता हैं।

अत: वे सभी लोग जो अपने जीवन में वित्तीय अनुशासन (FINANCIAL DISCIPILINE) रखना चाहते है तो उन्हें अपनी आयकर विवरणी बहुत सी परेशानियों से बचने के लिए नियत सीमा के अन्दर ही जमा कर देनी चाहिए।

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