विवाह सुख एवं ज्योतिष

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ज्योतिषाचार्य उषा अग्रवाल  मोबाइल: 09810438624

विवाह सुख एवं ज्योतिष

भारतीय संस्कृति मे गृहस्थ आश्रम को सबसे उत्कृष्ट माना गया है, कहा जाता है कि परमपिता परमेश्वर ने ही नर-नारी के रूप मे स्वयं को मूर्तिमान किया है, ताकि सृष्टि का सृजन हो सके और उसको मर्यादित रूप मे स्थापित करने के लिए विवाह प्रथा का जन्म हुआ, मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक के संस्कारो मे यह एक महत्वपूर्ण संस्कार है, दो अपरिचित व्यक्तियों (वर कन्या ) का दांपत्य सम्बन्ध मे बंधकर एक नए जीवन का प्रारम्भ करना विवाह कहलाता है, प्रत्येक माता-पिता अपने बच्चों के युवा होते ही उनके विवाह के सपने बुनने लगते है कि उनके बच्चों का विवाह सही समय पर, सही व्यक्ति से हो जाये मगर प्रत्येक माता पिता का यह सपना पूरा नहीं हो पाता क्योंकि हर जातक के पूर्व जन्मो के संचित कर्मानुसार ही जीवन साथी का चयन, समय और दिशा पत्रिका मे इंगित होती है, पत्रिका मे कुछ विलम्बकारी या बाधक योग होते है, तो विवाह सही समय पर नहीं हो पाता, जन्म कुंडली मे लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव दांपत्य जीवन से सम्बंधित होते है यदि ये भाव या इनके स्वामी पीड़ित हों तो विवाह सुख विलम्ब से मिलेगा या मिलेगा ही नहीं, इन भावों के साथ साथ विवाह सुख के कारक शुक्र की स्थिति भी देखना आवश्यक है, स्त्रियों के लिए बृहस्पति को पति का कारक माना गया है, यदि ये भाव और कारक पाप प्रभाव मे हो तो विवाह सुख मे कमी आती है, पत्रिका मे सप्तम भाव, सप्तमेश, गुरु, शुक्र का पीड़ित होना और द्वितीय भावेश का त्रिक भाव मे होना या सप्तमेश, अष्टमेश का स्थान परिवर्तन होना विवाह सुख मे बाधा उत्पन्न करते है यदि शुक्र बलहीन हो राहु लग्न मे हो और शनि केतु सप्तम भाव मे हो तो अधिक आयु मे विवाह होता है, यदि सूर्य और शुक्र के अंशो मे ४२ डिग्री से ज्यादा का अंतर हो तो विवाह की सम्भावना बहुत कम होती है, यदि पत्रिका मे मांगलिक या पितृ दोष हो तो भी विवाह मे विलम्ब होता है, इस प्रकार के योगो के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए ऐसे जातको को वृहस्पति देव की आराधना करनी चाहिए, गुरूवार के दिन केले की जड़ मे शुद्ध घी का दीपक और जल अर्पित करें और पीली मिठाई का भोग लगाकर ईश्वर से अपने विवाह की कामना करें, पीले वस्त्र धारण करें या हाथ मे सदैव पीला धागा बांधें, किसी भी निश्चित समय पर शुद्ध मन से शिव-पार्वती जी की मूर्ति के सामने ओम नमः पार्वतीपतये हर का १०८ बार जप करने से विवाह शीघ्र होता है | सोमवार को व्रत पूजन करने से शीघ्र मनवांछित जीवनसाथी की प्राप्ति होती है | यदि मांगलिक दोष हो तो मंगलवार के दिन सुन्दर कांड का पाठ करें, मांगलिक कार्यों मे बढ़-चढ़ कर हिस्सा लें, , इस प्रकार के कुछ सामान्य उपाय कर विवाह बाधाओं को दूर किया जा सकता है मगर प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली विशेष होती है उस पत्रिका की समस्त बाधाओं और दोषों को जानने के लिए आवश्यक है कि अभिभावक किसी कुशल ज्योतषी से पत्रिका का विश्लेषण कराएं ताकि समय पर समस्त अवरोधों का निवारण हो सके और उन्हें समस्त खुशियों का आनंद प्राप्त हो सके तथा उनके दाम्पत्य जीवन पर सदैव ईश्वर की कृपा बनी रहे. 20150314_154130

 

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