दीपावली – अंधकार से प्रकाश की ओर

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दीपावलीभारतवर्ष का सबसे प्रचलित त्यौहार है। यह कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। अमावस्या अर्थात् अंधकार पूर्ण रात्रि। परंतु इस दिन भारतवर्ष की यह रात्रि अमावस्या की एक अनूठी रात्रि होती है हर जगह प्रकाश पूर्ण दृश्य, दीपों से प्रकाशमान संसार और रंग-बिरंगे फूलों और मोमबत्तियों से सजा हुआ अनूठा,अलौकिक दृशय। इसकी शोभा अतुलनीय है। दीवाली के दिन तेल के दीपक जलाना अति शुभ माना जाता है इसकी रोशनी हमारे लिए एक मार्गदर्शक के रूप में मन से अंधेरे और बुरी मंशा को निकालकर नए प्रकाश और रोशनी की तरफ अग्रसर करती है। रंगोली के रंग हमारे जीवन में नया उत्साह और उमंग भरते हैं और घर परिवार के सभी लोग मिलकर दिवाली के इस पावन पर्व पर लक्ष्मी माता का पूजन करते हैं माना जाता है कि जहाँ लक्ष्मी का वास हो वहाँ जीवन में खुशहाली आती है। इसलिए लोग अपने दफ्तरों और आर्थिक व्यापार में भी नए बही खातों और नए कार्य की शुरूआत इस पावन दिन से करते है।

हिंदु सभ्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम और माता सीता, छोटे अनुज श्री लक्ष्मण जी सहित चौदह वर्षो के वनवास के पश्चात् अयोध्यापुरी को वापिस लौटे थे। इस उपलक्ष्य में अयोध्यावासियों ने दीप प्रज्जवलित कर व फूलों से उनका स्वागत किया था और तभी से ऐसी मान्यता है कि इस दिन को दिवाली के उपलक्ष्य में सारे भारत में मनाया जाता है।

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