पाकिस्तान में फिर होगा भारतीय फिल्मों का “दगंल

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गत् अक्टूबर 2016 से उरी हमलों के बाद भारत में IMPPA (Indian Motion Pictures Producers Association) द्वारा पाकिस्तानी कलाकारों पर और भारत में काम कर रहे अन्य तकनीकी विशेषज्ञो पर रोक लगा दी गई थी, जिसके चलते पाकिस्तान में भी वहाँ की थिएटर्स एशोसिएशन ने भारतीय फिल्मों के प्रर्दशन पर रोक लगा दी थी।

परन्तु आज 19 दिसम्बर 2016 से पाकिस्तान में फिल्म एक्सिविटर्स एशोसिएशन ने भारतीय फिल्मों के प्रर्दशन पर लगी हुई रोक को हटाने का फैंसला किया है। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के सिनेप्लेक्स की आय का लगभग 75% हिस्सा भारतीय फिल्मों के जरिए आता है।

पिछले कुछ महीनों में ही अपने फिल्म उधोग में भारी गिरावट और राजस्व में कमी के कारण पाकिस्तान के सिनेमा मालिकों ने यह फैसला लिया है। परन्तु अपने ही भारतीय फिल्मों पर रोक लगाने के फैसलों, को स्वयं ही वापिस लेने की झेंप को मिटाने के लिए वे अलग – 2 तर्क दे रहे है।

जैसे कि हमने (पाकिस्तान ने) भारतीयो फिल्मो पर पूरी तरह से स्थायी बैन नही लगाया था, वह केवल एक लिमिटेड समय के लिए था

हम यह बैन भारतीय कला और सिनेमा को support  करने के लिए हटा रहे है और उनसे भी एसा ही support चाहते है।

उनके तर्क चाहे कुछ भी रहे, परन्तु वास्तविकता यही है, पाकिस्तान का फिल्म उधोग भारतीय फिल्मों पर बहुत हद तक निर्भर है।

अब प्रश्न यह उठता है वहाँ पर इस बैन के समाप्त होने पर सबसे पहले कौन सी हिन्दी फिल्म प्रर्दशित होगी, जिसका उस फिल्म के निर्माताओ को पूरा – 2 लाभ मिल सकेगा। दूसरा, पाकिस्तान में तो इस सस्पेंशन को समाप्त कर दिया गया है, परन्तु क्या भारत में IMPPA पाकिस्तानी कलाकारो पर लगी रोक को समाप्त करेगी।

तीसरे, पाकिस्तान के सिनेमा मालिको ने तो इस सस्पेंशन को हटा दिया है परन्तु क्या वहाँ के कट्टरपथीं संघ उन्हे इसकी अनुमति देंगे ?

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