पीली धातु का मोह भंग

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सोने का भाव-22-07-2015             22carats Rs. 23860/-        24 carats Rs. 25270/-

 

बुधवार 22-07-2015 को सोने की कीमतो ने अपने पिछले 4 सालो के न्य़ूनतम  स्तर को छुआ। 28 अगस्त 2013, को जो कीमतें 33265 प्रति 10  ग्राम थी और रुपय़े की कीमत 68.85 प्रति डालर थी,उस समय पर निवेशकों ने सोने को एक अचछे निवेश विकल्प के रूप में देखा। परन्तु आज स्थितिे उसके बिल्कुल विपरीत है। अगर हम सोने के इन घटती हुई कीमतों के कारणों पर एक नजर डाले तो हम पाएगें की इसका मुख्य कारण हमारी वर्तमान केन्द्र सरकार और RBI दारा सोने के आयात पर लगाया जाने बाला कडे नियम और प्रावधान है। 2014 में भारत सोने के उपभोक्ता वर्ग में प्रथम स्थान पर था। और 2015 के पहले त्रैमासिकी में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। हम।रे देश में सोने को एक Productive सम्पत्ति नही बलिक एक संग्रहण सम्पत्ति के रूप में इकट्ठा किया जाता हैं जो कि देश के  विकास में अपना योगदान नही देता बलिक उस पूजीं कों निरस्त  करके block कर देता है। और जो की माननीय़ प्रधानमत्रीं श्री नरेन्द्र मोदी जी की नीतियों कें विरुध्द है। अतः वे इस निवेश और आयात को बढ़ावा नही दे रहें हैं|

सोने की कीमतों में कमी आने का एक मुख्य कारण मानसून की कमजोर स्थिति के कारण  ग्रामीण वर्ग से होने वाली सोने की माँग में कमी भी है।

इसके अलावा डॉलर की मजबूत स्थिति से और उसकी वजह से रुपय़े की कीमत कम होने से एक आम आदमी को सोने की खरीद के लिए, अपनी आय के बङे भाग को खपाना पङता है जिससे एक निवेशक सोने की जगह पर अधिक आय वाले विकल्प को निवेश के लिए चुनता है।

उपरोक्त राष्ट्रीय कारणो के अतिरिक्त, बुधवार को आई सोने की कीमतों मे कमी कारण गत दिनो मे चीन वाजार मे लगातार , भारी मात्रा मे सोने की बिकवाली और US मे federal reserve bank द्वारा ब्याज दर में वृद्धि करने की घोषणा भी है, जिसके कारण एक निवेशक एक लाभप्रद निवेश के रूप में सोने की अपेशा, US Dollar में निवेश करना पसंद कर रहा है|

इसके अलाबा अन्तराष्टीय बाजार में commodity market में होने वाली अनिश्तितता भी सोने की कभी का एक मुख्य कारण है।

अब प्रश्न यह उठता है कि सोने की कीमतों में आई इस कमी को वित्तीय विश्लेषक और विशेषज भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए  किस तरीके से परिथाषित करेंगे|

अंत में हम यह कह सकते है इस सोने की चिड़िया को यदि हमे वास्तव मे ऐसा ही बनाना है तो इसके सोने को छिपाकर या सग्रंह करके नही बल्कि उसे किसी और रुप मे परिवर्तित करके देश के उत्पादकीय क्रियाओं मे लगाकर पूंजी निर्माण के काम मे लगाकर ही सोने की चिड़िया बना सकते है|

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