ग्रहों का मानव से सम्बन्ध तथा प्रभाव

Astrology Topics
Save

Business Mantra News


मुख्य ग्रह सात ही है और उनके सात ही रंग है तथा पृथ्वी पर सात ही प्रकार की किरणें सूर्य और अन्य ग्रहों के प्रकाश से पड़ती है । सम्भवतः इसी कारण इन ग्रहों से सम्बन्धित नग-पत्थर आदि भी सात रंगों में ही उपलब्ध होते है जिन्हें सम्बन्धित ग्रह को अनुकूल करने के लिए धारण किया जाता है । उदाहरण के लिए प्रिज्म नामक त्रिकोण काँच से सूर्य का प्रकाश निकालने पर प्रकाश का सात रंगों में विभाजन हो जाता है और यह सात रंग भली प्रकार देखे जा सकते है और सूक्ष्म परीक्षण से इन रंगों के भिन्न-भिन्न अनुपात को सूर्य के प्रकाश में देखा जा सकता है ।

यह अनुपात प्रत्येक ग्रह के प्रकाश में किसी एक रंग की किरणों का अधिक या कम होता है । शनि की किरणों में श्यामलता लिए हुए नीला रंग, बृहस्पति की किरणों में पीला रंग, शुक्र की किरणों में सफेद रंग, बुध की किरणों में हरा, मंगल की किरणों से लाल, चन्द्रमा की किरणों में हलका पीलापन लिए सफेद और सूर्य की किरणों सुनहला स्वर्ण रंग दिखता है तथा इसी प्रकार शरीर पर भी इन किरणों का प्रभाव शरीरगत विभिन्न तत्वों पर वराबर बना रहता है ।

हमारे सारे शरीर का संचालन ग्रहों के द्वारा ही होता है । सूर्य नेत्र में स्थिर होकर जीव मात्र को देखने की शक्ति प्रदान करता है और आमाशय में बैठकर पाचन क्रिया को संचालित करता है । चन्द्रमा मन को प्रभावित करता है तथा जल तत्व को सम्यक् रूप से नियंत्रित करता है । मंगल रक्त को शरीर में संचालित करता है । बुध बुद्धि तथा हृदय का स्वामी होकर हर प्रकार का आनन्द हृदय को प्रदान करता है । बृहस्पति मेघा बुद्धि को संचालित कर ज्ञान प्रदान करता है । शुक्र जिह्वा तथा जननेन्द्रिय में निवास कर हर प्रकार के रसों का रसास्वादन कराता है और जनेन्द्रिय के सारे भोगों का रस प्रदान करता है । उदर को चलाने का कार्य शनि, राहु तथा केतु तीन ग्रह करते है । शनि स्नायु-मंडल का स्वामी है । राहु नाभि से चार अंगुल नीचे बैठता है और पडलियों में बैठकर चलने की शक्ति प्रदान करता है । केतु पाचन तन्त्र तथा पैर के तलवों में निवास करता है और मानव मात्र को चलाता है । जब ग्रह प्रतिकूल होते हैं तो अपने से सम्बन्धित शरीर के अंगों को प्रभावित करते है प्रभावित अंगों में ग्रह की स्थिति के अनुसार दोड्ढ, विकृति आ जाती है और वह देखने मात्र के रह जाते ह और उनसे कोई काम नहीं लिया जा सकता है । ग्रहों का प्रभाव गर्भकाल से ही आरम्भ हो जाता है और गर्भकाल में ही वह ग्रह अंगों को कुरूप और सारहीन कर देते है , और अंगों की काम करने की ताकत कम हो जाती है या नष्ट हो जाती है ।

अगर आप ग्रहो की जानकारी के बाद राशिफल के बारे में जानना चाहते है तो यहां Click करें

About the author

admin